भारत ने अपने तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित देश का पहला स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) अब “क्रिटिकलिटी” के चरण में पहुँच गया है। इसका मतलब है कि रिएक्टर में परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) सफलतापूर्वक और स्थिर रूप से शुरू हो चुकी है।
यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर न केवल बिजली उत्पादन करता है, बल्कि उपयोग किए गए ईंधन से अधिक नया ईंधन भी तैयार करता है। यह भारत के दूसरे चरण की मुख्य कड़ी है, जो आगे चलकर थोरियम आधारित ऊर्जा के रास्ते को खोलता है।
इस परियोजना को BHAVINI द्वारा विकसित किया गया है। PFBR की सफलता से भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक मजबूत कदम आगे बढ़ा रहा है और भविष्य में स्वच्छ व सस्ती बिजली की संभावनाएँ और मजबूत हो रही हैं।
इसका सरल अर्थ और महत्व दिए गए है
1. यह “ब्रीडर” रिएक्टर क्या है?
सामान्य रिएक्टर केवल ईंधन खर्च करते हैं, लेकिन ‘ब्रीडर’ रिएक्टर की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे कहीं ज्यादा ईंधन पैदा करता है।
- इसमें MOX (मिश्रित ऑक्साइड) ईंधन का उपयोग होता है, जो यूरेनियम और प्लूटोनियम का मिश्रण है।
- रिएक्टर के चारों ओर यूरेनियम-238 की एक परत (Blanket) होती है। प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले तेज़ न्यूट्रॉन इस परत को नए ईंधन यानी प्लूटोनियम में बदल देते हैं।
इस रिएक्टर में मुख्य रूप से MOX ईंधन (यूरेनियम और प्लूटोनियम का मिश्रण) उपयोग किया जाता है। जब यह ईंधन जलता है, तो बहुत तेज़ न्यूट्रॉन निकलते हैं। ये न्यूट्रॉन रिएक्टर के चारों ओर रखे यूरेनियम-238 से टकराते हैं और उसे प्लूटोनियम में बदल देते हैं।इस प्रक्रिया में दो काम एक साथ होते हैं—पहला, बिजली बनाने के लिए ऊर्जा मिलती है और दूसरा, नया परमाणु ईंधन तैयार होता है। यही वजह है कि इसे “ब्रीडर” यानी “ईंधन पैदा करने वाला” रिएक्टर कहा जाता है।
इसमें सोडियम जैसे द्रव का उपयोग ठंडा करने (cooling) के लिए किया जाता है, क्योंकि यह तेज़ गर्मी को जल्दी कम कर देता है। कुल मिलाकर, ब्रीडर रिएक्टर भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण और उन्नत तरीका है।
2. भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए यह तकनीक बहुत महत्वपूर्ण है। देश में यूरेनियम सीमित मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए लंबे समय तक केवल उसी पर निर्भर रहना मुश्किल है। इसके विपरीत, भारत के पास थोरियम (Thorium) का बहुत बड़ा भंडार है, जो भविष्य में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बन सकता है। लेकिन थोरियम को सीधे रिएक्टर में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, इसलिए पहले इसे उपयोगी ईंधन में बदलना जरूरी होता है।
सीढ़ी के रूप में:– फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इस प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाता है। यह प्लूटोनियम तैयार करता है, जिसकी मदद से आगे चलकर थोरियम को यूरेनियम-233 में बदला जाता है। इसलिए इसे थोरियम उपयोग की दिशा में एक “दरवाजा” माना जाता है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता: – इस तकनीक के सफल होने से भारत को बिजली के लिए दूसरे देशों या कोयले पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और प्रदूषण भी कम होगा।
3. तीन चरणों वाला कार्यक्रम
भारत का तीन चरणों वाला परमाणु कार्यक्रम एक दूरदर्शी योजना है, जिसका उद्देश्य देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। यह रणनीति भारत की प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिसमें यूरेनियम कम और थोरियम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
चरण 1: प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली उत्पादन
इस चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग कर परमाणु रिएक्टरों में बिजली बनाई जाती है। भारत के अधिकांश वर्तमान रिएक्टर इसी तकनीक पर आधारित हैं। इस प्रक्रिया में ऊर्जा के साथ-साथ प्लूटोनियम भी उत्पन्न होता है, जो अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होता है।
चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR)
यह चरण भारत के परमाणु कार्यक्रम का सबसे अहम हिस्सा है। इसमें प्लूटोनियम को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। खास बात यह है कि यह रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक नया ईंधन पैदा करता है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थापित PFBR इसी तकनीक का उदाहरण है। यह सफलता भारत को थोरियम उपयोग की दिशा में आगे बढ़ाती है।
चरण 3: थोरियम आधारित रिएक्टर
यह भविष्य का चरण है, जिसमें थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में बदलकर बिजली बनाई जाएगी। यह तकनीक भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है क्योंकि थोरियम के विशाल भंडार के कारण देश को लगभग असीमित ऊर्जा मिल सकती है। इस पूरी तकनीक को BHAVINI द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


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